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80G12ABसमिति पंजीकरण 2708

हमारे बारे में

इंदिरा नगर, लखनऊ में एक कल्याण और शैक्षिक केंद्र

करबला, अमराई गाँव के समुदाय के सदस्यों द्वारा स्थापित, हमारा कार्य अनाथ एवं प्रतिभाशाली बच्चों की शिक्षा — और अहल अल-बैत की सेवा में मजलिस-ए-अज़ा के आयोजन पर केंद्रित है।

मिशन एवं दृष्टि

हम क्यों मौजूद हैं

यतीमों को तालीम देना। अहले-बैत का एहतराम। इंदिरा नगर की ख़िदमत।

हमारा मिशन

गुलिस्तान ए मेहदी वेलफेयर एंड एजुकेशनल सोसाइटी की स्थापना करबला, अमराई गाँव — इंदिरा नगर, लखनऊ — के समुदाय के लोगों ने की थी, ताकि हमारे मोहल्ले के यतीम और पढ़ाई में होनहार बच्चों के लिए औपचारिक तालीम का दरवाज़ा खोला जा सके। जहाँ किसी परिवार ने घर का मुख्य कमाने वाला खो दिया हो, या जहाँ होशियार बच्चों के घर में किताबें न हों, वहाँ हम स्कॉलरशिप, रहनुमाई और अपनेपन के एहसास के साथ आगे आते हैं।

इस तालीमी मिशन के साथ-साथ, हमें मुहर्रम के दौरान, अय्याम-ए-फ़ातिमी में और साल भर मजलिस-ए-अज़ा की मेज़बानी का शरफ़ हासिल है — जिनमें हम मौलाना शब्बीर अली वारसी समेत सम्मानित उलेमा को आमंत्रित करते हैं, ताकि अहले-बैत (अ.स.) की राह को याद किया जाए और उसे ताज़ा किया जाए।

हमारा विज़न

एक ऐसा मोहल्ला जहाँ कोई यतीम बच्चा फ़ीस न भर पाने की वजह से पढ़ाई न छोड़े, और कोई भी पढ़ने का ख़्वाहिशमंद छात्र किताबें न होने की वजह से पीछे न रह जाए — जहाँ हर मजलिस में इमामों का पैग़ाम ज़िंदा रहे, और जहाँ हर दानदाता को ठीक-ठीक पता हो कि उसकी दी हुई रक़म कहाँ गई।

— या मेहदी (अ.ज.)

बुनियादी उसूल

चार शब्द, जिनकी कसौटी पर हम ख़ुद को परखते हैं

ख़िदमत

समुदाय की ख़िदमत — न मसलक के भीतर की सियासत, न किसी गुट की ठेकेदारी।

तालीम

तालीम सबसे पहले — दीनी और दुनियावी, हर उस बच्चे के लिए जिसकी पढ़ाई का ज़िम्मा हम उठाते हैं।

करामत

इज़्ज़त — लाभार्थियों का नाम लिया जाता है, उनकी तस्वीरें सहमति से ली जाती हैं, और उन्हें कभी सिर्फ़ तरस का पात्र बनाकर नहीं दिखाया जाता।

ईमानदारी

ईमानदारी — ऑडिट किया हुआ हिसाब-किताब, समय पर Form 10BE, ट्रस्टियों के नाम सबके सामने, और मरजा की निगरानी।

इतिहास एवं संस्थापक

2014 में लगाया गया एक बाग़

गुलिस्तान-ए-मेहदी का उद्घाटन लखनऊ में मंगलवार, 14 अक्टूबर 2014 को इसके संस्थापक मरहूम इंजीनियर मज़हर अब्बास रिज़वी की पहल पर हुआ। पहले ही दिन चौदह यतीम बच्चों को दाख़िला दिया गया।

हम कौन हैं

गुलिस्तान-ए-मेहदी में आपका स्वागत है

गुलिस्तान-ए-मेहदी यतीमख़ाने की स्थापना 14 अक्टूबर 2014 को हुई, जिसमें 14 यतीम बच्चों को दाख़िला दिया गया। कमेटी का मुख्य मक़सद हर बच्चे को आधुनिक और दीनी तालीम के साथ-साथ किसी पेशेवर या व्यावसायिक हुनर में महारत दिलाकर अपने पैरों पर खड़ा होने के क़ाबिल बनाना है। इस समय छात्रों में से एक सरकारी विश्वविद्यालय से कंप्यूटर साइंस में B.Tech कर रहा है, और बाक़ी छात्र लखनऊ के प्रतिष्ठित स्कूलों में अपनी पढ़ाई जारी रखे हुए हैं। उन्हें खाना, रहने की जगह, कपड़े, इलाज और पढ़ाई की सामग्री जैसी सभी सुविधाएँ मुफ़्त दी जाती हैं। कुछ बच्चों के न पिता हैं, न माता और न ही कोई क़रीबी रिश्तेदार।

शिलान्यास पट्टिका का अनावरण, 14 अक्टूबर 2014और तस्वीरें

हमारे संस्थापक

इंजीनियर मज़हर अब्बास रिज़वी की याद में

उन्होंने बहुत कम माँगा और बहुत ज़्यादा दिया। नर्म दिल और प्यारी मुस्कान वाले एक ख़ूबसूरत और शरीफ़ इंसान, वे सबके लिए हौसले का ज़रिया थे। वे अपनी बात के पक्के थे, जो सुनते थे और जो कहते थे उसे पूरा करके दिखाते थे। वे सादा जीवन और उच्च विचार में यक़ीन रखते थे। उनके काम, उनका प्यार और उनकी फ़िक्र — सिर्फ़ अपने परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि उस समाज के लिए भी जिसमें वे रहते थे — हमेशा याद रखे जाएँगे। वे एक बेहतरीन बेटे थे जिन्होंने अपने माँ-बाप का बहुत ख़याल रखा, एक प्यार करने वाले शौहर और अपने बच्चों के हीरो थे। वे खुले दिमाग़ के, तरक़्क़ीपसंद और उसूलों वाले इंसान थे। उनका मानना था कि तालीम ही तरक़्क़ी का एकमात्र ज़रिया है, और उनके बच्चे और नाती-पोते फ़ख़्र के साथ उनके नक़्शे-क़दम पर चलते हैं।

उन्होंने अपनी ज़िंदगी ग़रीबों और यतीमों की भलाई में लगा दी। ज़रूरतमंदों की मदद करना और उनकी ज़रूरतें पूरी करना, इसे वे निःस्वार्थ भाव से अपना धर्म मानते थे। अपने जीवनकाल में उन्होंने यतीम बच्चों की परवरिश और सहारे के लिए यतीमख़ाना गुलिस्तान-ए-मेहदी की बुनियाद रखी, जिसकी देखभाल अब उनके बेटे मीसम अब्बास करते हैं। इन्हीं वजहों से आज भी उन्हें पहचाना और याद किया जाता है। उनकी कमी सबको हमेशा महसूस होती रहेगी।

अहम पड़ाव

अब तक का हमारा सफ़र

  1. 2014

    उद्घाटन

    मंगलवार, 14 अक्टूबर 2014 को लखनऊ के मौलाना निसार अहमद साहब द्वारा उद्घाटन। संस्थापक: इंजीनियर मज़हर अब्बास रिज़वी। चौदह यतीम बच्चों को दाख़िला दिया गया।

  2. 2015

    सोसाइटी का पंजीकरण

    सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 (उत्तर प्रदेश) के तहत 9 मार्च 2015 को पंजीकरण संख्या 2708 के रूप में पंजीकृत, जिसका पंजीकृत कार्यालय वंडर लैंड ग्रीन-II, करबला के पास, अमराई गाँव, लखनऊ 226028 में है।

  3. 2025

    पंजीकरण का नवीनीकरण

    सोसाइटी रजिस्ट्रार, उत्तर प्रदेश द्वारा 15 अक्टूबर 2025 को 9 मार्च 2025 से पाँच वर्षों के लिए नवीनीकृत (नवीनीकरण संख्या R/LUC/09928/2025-2026)।

  4. आज

    बड़े होते बच्चे

    यहाँ रहने वाले बच्चों में से एक सरकारी विश्वविद्यालय से कंप्यूटर साइंस में B.Tech कर रहा है; बाक़ी बच्चे लखनऊ के प्रतिष्ठित स्कूलों में अपनी पढ़ाई जारी रखे हुए हैं। संस्थापक के सबसे बड़े बेटे मीसम अब्बास अध्यक्ष के रूप में सोसाइटी का नेतृत्व कर रहे हैं।

अध्यक्ष का संदेश

हमारे अध्यक्ष की ओर से एक संदेश

मीसम अब्बास

जनाब मीसम अब्बास मरहूम इंजीनियर मज़हर अब्बास रिज़वी के सबसे बड़े बेटे हैं। उनके इरादे फ़ौलाद जैसे मज़बूत हैं और दिल सोने जैसा। “यतीमों के पिता” के नाम से मशहूर इमाम अली (अ.स.) से प्रेरणा लेकर मीसम अब्बास ने ज़्यादा से ज़्यादा यतीमों को बेहतर ज़िंदगी और अत्याधुनिक तालीम देने का बीड़ा उठाया। इसी मिशन के साथ उन्होंने गुलिस्तान-ए-मेहदी की बुनियाद रखी।

“गुलिस्तान” का मतलब है बाग़। अगर मज़हर अब्बास ने इस बाग़ के लिए मिट्टी दी, तो मीसम अब्बास इसके माली हैं। गुलिस्तान-ए-मेहदी के बच्चे उन्हें प्यार से “बाबा” (फ़ारसी में पिता) कहकर बुलाते हैं।

— मीसम अब्बास

न्यासी

न्यासी और प्रबंध समिति

हर निर्णय के पीछे नामित पदाधिकारी।

मीसम अब्बास

अध्यक्ष

जनाब मीसम अब्बास मरहूम इंजीनियर मज़हर अब्बास रिज़वी के सबसे बड़े बेटे हैं। उनके इरादे फ़ौलाद जैसे मज़बूत हैं और दिल सोने जैसा। “यतीमों के पिता” के नाम से मशहूर इमाम अली (अ.स.) से प्रेरणा लेकर मीसम अब्बास ने ज़्यादा से ज़्यादा यतीमों को बेहतर ज़िंदगी और अत्याधुनिक तालीम देने का बीड़ा उठाया। इसी मिशन के साथ उन्होंने गुलिस्तान-ए-मेहदी की बुनियाद रखी।

“गुलिस्तान” का मतलब है बाग़। अगर मज़हर अब्बास ने इस बाग़ के लिए मिट्टी दी, तो मीसम अब्बास इसके माली हैं। गुलिस्तान-ए-मेहदी के बच्चे उन्हें प्यार से “बाबा” (फ़ारसी में पिता) कहकर बुलाते हैं।

शाहनवाज़ हुसैन रिज़वी

कोषाध्यक्ष

श्री शाहनवाज़ हुसैन रिज़वी गुलिस्तान-ए-मेहदी के कोषाध्यक्ष हैं। वे संस्था के समग्र कामकाज की देखरेख करते हैं, जिसमें लेखा-जोखा और नक़दी प्रबंधन शामिल है, और यह सुनिश्चित करते हैं कि सभी आय (ट्यूशन फ़ीस, अनुदान, दान) और खर्च (वेतन, मज़दूरी, रख-रखाव) गुलिस्तान-ए-मेहदी की लेखा प्रणाली में सही-सही दर्ज हों। संस्था का कामकाज सुचारु रूप से चलता रहे, इसके लिए वे एक मशीन की तरह काम करते हैं।

वे बच्चों के प्यारे “चाचू” (चाचा) हैं। वे इस बात का ख़याल रखते हैं कि बच्चों की सभी ज़रूरतें पूरी हों, और उन्हें पिकनिक, शॉपिंग, डिनर और आइसक्रीम के लिए बाहर ले जाकर ख़ूब लाड़ लड़ाते हैं।

आरिज़ अब्बास

ट्रस्टी

व्यवसायी और समाजसेवी

श्री आरिज़ अब्बास मरहूम इंजीनियर मज़हर अब्बास रिज़वी के बेटे हैं। पेशे से वे व्यवसायी हैं और दिल से एक समाजसेवी। उन्हें बच्चों के साथ वक़्त बिताना बहुत पसंद है और वे उनकी तालीम में गहरी दिलचस्पी लेते हैं। उन्होंने छात्रों को उनके स्कूली पाठ्यक्रम और प्रतियोगी परीक्षाओं में मदद देने के लिए कई ट्यूटर और प्रशिक्षक नियुक्त किए हैं।

मासूम अब्बास

ट्रस्टी

कंप्यूटर साइंस इंजीनियर (B.Tech CSE, MBA)

श्री मासूम अब्बास (B.Tech (CSE), MBA) मरहूम इंजीनियर मज़हर अब्बास रिज़वी के पोते और श्री मीसम अब्बास के बेटे हैं। अपने पिता के नक़्श-ए-क़दम पर चलते हुए मासूम अब्बास संस्था के काम में गहरी दिलचस्पी लेते हैं। एक कंप्यूटर साइंस इंजीनियर के तौर पर वे बच्चों को तकनीकी तरक़्क़ी की ताज़ा जानकारी देते रहते हैं। बच्चे उन्हें अपना आदर्श मानते हैं और उनकी तरह इंजीनियर बनने की ख़्वाहिश रखते हैं।

डॉ. मुनील अब्बास

ट्रस्टी

डॉक्टर (MBBS, DA, IDCCM)

डॉ. मुनील अब्बास (MBBS, DA, IDCCM) मरहूम इंजीनियर मज़हर अब्बास रिज़वी के सबसे छोटे बेटे हैं और लखनऊ के एक जाने-माने डॉक्टर हैं। वे छात्रों की हर महीने मुफ़्त स्वास्थ्य जाँच करते हैं। उनकी सेहत का ख़याल रखने के साथ-साथ वे बच्चों की विज्ञान के विषयों में भी मदद करते हैं। वे अपनी व्यस्त दिनचर्या से समय निकालकर बच्चों से मिलते-जुलते हैं और करियर की राह और समय प्रबंधन पर उन्हें सलाह देते हैं।

श्रीमती रानी ज़ैदी

ट्रस्टी

शिक्षिका (MA अंग्रेज़ी, B.Ed)

एक शिक्षिका अपने विद्यार्थियों के लिए दूसरी माँ होती है, और गुलिस्तान-ए-मेहदी में श्रीमती रानी ज़ैदी (MA (अंग्रेज़ी), B.Ed) उनकी माँ हैं। शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा होने के नाते वे इसके प्रतिस्पर्धी माहौल और विद्यार्थियों के सामने आने वाली चुनौतियों को समझती हैं। वे उनके विकास और संवाद-कौशल की देखरेख की ज़िम्मेदारी उठाती हैं। पढ़ाई और पाठ्येतर गतिविधियों में उन्हें प्रोत्साहित करने की उनकी कोशिशें उन्हें ज़िंदगी में कामयाब होने के लिए ज़रूरी आत्मविश्वास और हुनर विकसित करने में मदद करती हैं।

अनुपालन

पंजीकरण और अनुपालन

सोसाइटी के पास उपलब्ध प्रत्येक पंजीकरण, जारी होने पर उसके पहचान संख्या के साथ। प्रमाणपत्र अनुरोध पर उपलब्ध हैं और संबंधित सरकारी पोर्टल पर सत्यापन योग्य हैं।

Society Reg.

सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 (यूपी)

2708 · dated 09/03/2015 · renewed 09/03/2025 for 5 years (R/LUC/09928/2025-2026)

PAN

स्थायी खाता संख्या

AACAG7831J

12A / 12AB

आयकर अधिनियम — धर्मार्थ स्थिति हेतु पंजीकरण

संख्या अभी प्रकाशित नहीं हुई।

80G

आयकर अधिनियम — दाता 50% कटौती की पात्रता

संख्या अभी प्रकाशित नहीं हुई।

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धार्मिक संरक्षण / मरजा संबद्धता

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वार्षिक रिपोर्ट और अंकेक्षित वित्तीय विवरण

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